नज़्म - मोहताज़ ज़िन्दगी

September 22, 2017
रौशनी की मोहताज परछाइयां, अंधेरों में साथ छोड़ देती हैं, साँसों की मोहताज़ ज़िन्दगी, थक कर साथ छोड़ देती है, इश्क़ जरा सी बात पर रूठ जाता है...

नज्म- जी लेने दो

September 22, 2017
थोड़ा वक़्त ले लेने दो, थोड़ी ज़िन्दगी जी लेने दो, तुम्हारी, उसकी, सबकी बोहत सुनली मैंने, मुझे थोड़े अब अपने मन की कर लेने दो, परहेज़ नज़रों ...

हाँ, एक फूल हूँ मैं

September 14, 2017
हाँ, एक फूल हूँ मैं, पौधे में निकला कली से मिला, खुद में एक सम्पूर्ण हूँ मैं, बेनाम लगे झाड़ की पहचान मुझसे है, वीरान पड़े बाग की आब मु...

लड़कियां महफूज क्यूँ नहीं - शम्भूनाथ | HindiWritings.com

लड़कियां महफूज क्यूँ नहीं - शम्भूनाथ | HindiWritings.com घर घर में जहाँ पूजा हो ||  पूजी जाती हो मुर्तिया ||   उस देश में मु...

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