नज़्म- तवायफ़


जिसकी चौखट की मिट्टी के बिना,
माँ दुर्गा की मूरत नहीं बनती,
उसे तवायफ़ कहते हैं,
तुम्हारी हवस निकल के कहर ना मचाए,
बस इसीलिए तन जो अपना बेचे,
उसे तवायफ़ कहते है,
बुढ़ापे में जिसे कोई सहारा नहीं देता,
माँ, बेटी या बहन का दर्ज़ा नहीं देता,
उसे तवायफ़ कहते हैं,
जिसका लिहाज़ तुम नहीं करते,
जिसका तुम नाम तक नहीं पूछते,
बस जिसका कमरा नंबर ही तुम जानते हो,
उसे तवायफ़ कहते है,
खरीद के कुछ वक़्त जिसका,
बिस्तर तक खींचते हो,
उसे तवायफ़ कहते है,
जिसे सरे बाजार तुम गाली कहते हो,
राह से छू के गुज़र जाए तो परेशानी समझते हो,
उसे तवायफ़ कहते है ।।

                                        ✍प्रियांश वर्मा



निवेदन:- अगर आपको यह "नज़्म" अच्छी लगी हो तो इसे शेयर करें और अपने अनुभव हमें Comment करके जरूर बताएं। आपका सुझाव अमूल्य है।


यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे  E-mail करें. हमारी Id है: hindiwritings@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!

No comments

लड़कियां महफूज क्यूँ नहीं - शम्भूनाथ | HindiWritings.com

लड़कियां महफूज क्यूँ नहीं - शम्भूनाथ | HindiWritings.com घर घर में जहाँ पूजा हो ||  पूजी जाती हो मुर्तिया ||   उस देश में मु...

Powered by Blogger.