नज़्म - कुछ लोग




ज़िन्दगी से कुछ लोग चले जाते हैं,
कुछ हिस्से अपने छोड़ जाते है,
बात ख़त्म हुई थी कुछ किस्सो से
आज भी कुछ किस्सो के ज़िक्र बाकी रह जाते हैं ।

ज़िन्दगी से कुछ लोग चले जाते हैं,
कुछ हिस्से अपने छोड़ जाते हैं ।।

वो बीता हुआ लम्हा कभी किसी रोज़ फिर याद आ जाता हैं,
वो गुज़रा हुआ लम्हा हमे फिर उस चौराहे पर ला खड़ा करता हैं,
जाने को चार रास्ते है जहां
मगर उस मोड़ पर ही रुकने को जी चाहता हैं ।

वो बीता हुआ लम्हा कभी किसी रोज़ फिर याद आ जाता हैं ।।

एक रोज़ ज़िन्दगी में फिर से शाम हुई,
फिर वो तन्हा अंधेरी रात हुई,
एक परी आई हमें चिढ़ाने को,
मानो आई हो जैसे हमारी हँसी उड़ाने को,
उसके साथ बैठकर थोड़ा हम भी हँस दिए,
गम भरा था दिल में
लब थे जो थोड़ा हँस दिए ।
बनते क्या, संवरते क्या,
हम जहाँ थे वही बिखर गए ।
ज़िन्दगी रूकती नहीं किसी के लिए,
कभी हंसकर, कभी रो कर हम भी चल दिए ।।

                                        ✍ प्रियांश वर्मा
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