हिंदी कविता "आसमां"

आसमां

अभी तो तूने  पंख भर ही फैलाएं है,
अभी तो आसमां से मुलाकात करना बाकी है।
अभी तो जुनून ने हिम्मत कर कदम बढ़ाएं है,
अभी तो राहों से गुफ्तगू करना बाकी है।
जानता है तू, ना कम है तू किसी से भी।
आशा की किरण संग है, तेरे फिर भी,
हो अगर भय मन में कभी भी
तू ठहर कर,
पुकारना खुद को।
हो चंचल, अगर मन कभी भी
तू याद करना हर वो पल
जिस वजह से चला था, तू इस सफ़र पर।
याद करना वो सुकून,  जो मिलेगा तुझे पाकर तेरी मंजिल को।
अगर दम है, चुनौतियों में तुझे रोकने का।
जा, जाकर बतादे तू उन्हें
कि " जोश मुझमें भी कम न है,
मुकाबले से मुकाबला करने का।


               ✍सिमरन मनोचा (@writing.bird)




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