दगाबाज || Dagabaj - HindiWritings.com






दगा बाज तूने दाग लगाया ॥

मै दाग छुपाये घूम रही हूँ ॥

गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २

सोलह थी साल मेरी उम्र थी ॥

थी कोलम कच्ची कुवारी ॥

आँखों का जादू चला के तूने ॥

बना दिया प्रेम दीवानी ॥

तेरे बिना अब रह नहीं पाती ॥
तेरी विरह में सूख रही हूँ ॥
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २
ख़ुशी के मोती हमें खिला के ॥
प्रेम मोह की लगन लगा के ॥
मन में अपना दीप जला के ॥
चमन बाग़ में कली खिला के ॥
सातो जनम का नाता जोड़ के ॥
तेरे चरणो को चूम रही हूँ ॥
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २


✍ शंभु नाथ




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