हमारे लिए (Hamare Liye) by Shambhu Nath | HindiWritings.com

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हमारे लिए - शम्भूनाथ कैलाशी


निगाहें थी उनकी
इशारा था उनका ।।
मेरे हुस्न पर ओ ॥
फ़िदा हो गये थे ॥

मै हंसी को लुटाती ॥
मचनले लगी थी ॥
वे बातो से मेरी ॥
रजा हो गए थे ॥


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मांगी जो मन्नत ॥
मिलने लगी थी ॥
खुशिया हमारी ॥
चहकने लगी थी ॥
सातो बचन का ओ || 
पालन किये जब || 
अब हमारे लिए वे 
सदा  हो गए थे ॥

बाहो में हमको ॥
झुलाते थे हरदम ॥
फिकर भी हमारी ॥
करते थे पल पल ॥
गम को कभी पास ॥
आने न देते ॥
हमारे लिए वे ॥
खुदा बन गये थे ॥


✍शम्भू नाथ कैलाशी


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