देशी आदमी (Deshi Aadmi) by Shambhu Nath || HindiWritings


Poem on deshi aadmi who hates today's generation because of demands

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देशी आदमी (Deshi Aadmi) – शम्भूनाथ


गलत ढंग से कैसे पूरी || 

करूँ बच्चो की ख्वाहिश || 

मै पसंद नहीं करता हूँ  || 

मॉर्डन युग की फरमाइश || 


कट ब्लाऊज मैडम को चहिये || 

दिख जाये पूरी  शरीर || 

जब सड़क पर चले मचल कर || 

यूँ मौसम बने अधीर || 

अपने यौवन के जादू का || 

करे खूब अजमाइश || 

मै पसंद नहीं करता हूँ  || 

मॉर्डन युग की फरमाइश || 



लड़की कहती जींस पैंट ओ || 

जिसमे सत्तर हो छेद || 

सुनकर उसको बातो को मै || 

होकर गिरा अचेत || 

नभ मंडल से पुरखे बोले || 

लगेगी कहा नुमाइश || 

मै पसंद नहीं करता हूँ  || 

मॉर्डन युग की फरमाइश || 

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लड़के को वही चाहिये || 

जिससे भेदे वह लंका || 

जिधर जिधर जिस ओर ओ जाये || 

बाजे उसी का डंका || 

तभी रात में न करने पर || 

बीबी खूब शोर मचाइश || 

मै पसंद नहीं करता हूँ  || 

मॉर्डन युग की फरमाइश || 


✍शम्भू नाथ कैलाशी 

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