आदत

बहुत ख़यालों में उलझा हुआ रहता हू आज कल, लेकीन तेरे ज़ुल्फ़ों में उलझ जाने का ख़याल पसंद है मुझे..

इन्सान है हम ग़लतियाँ ज़रूर करते है, लेकीन तेरा ग़लती होने पर दाँत में उँगली दबाना पसंद है मुझे..

हाँ में सिगारेट फुँकता हू. पता है मुझे ये आदत बुरी है. लेकीन आज भी तेरी तस्वीर धुएँ में बनाना पसंद है मुझे..

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