नज़्म – मेरा मेहबूब || Hindi Writings

Mera mehbub
मेरा मेहबूब


सोचो के मेरा मेहबूब कैसा होगा,
खूबसूरती से उसकी कितना कहर होगा,
वो लाखों में एक नहीं, वो बस एक होगा,
सोचो मेरा मेहबूब कितना सुन्दर होगा,
उसकी आँखें झील सी नहीं होंगी,
वो तो एक पूरा समंदर होगा,

सोचो मेरा मेहबूब कितना सुन्दर होगा,
माथा उसका बड़ा खुला मैदान सा होगा,
सोचो मेरा मेहबूब कितना सुन्दर होगा,
लब उसके गुलाब से नहीं होंगे,
वो तो बल्कि पूरा गुलशन होगा,

सोचो मेरा मेहबूब कितना सुन्दर होगा,
हाथों की उँगलियाँ जैसे, संगमरमर पर उकेरी कोई तस्वीर होगी,
संगमरमर सा सख्त नहीं,
वो तो मखमल सा नर्म होगा,
सोचो मेरा मेहबूब कितना सुन्दर होगा,

झुलफें उसकी घनी काली नहीं होंगी,
ऐसे होंगी जैसे खुला स्याह गहरा आसमान होगा,

सोचो मेरा मेहबूब कितना सुन्दर होगा,
रूह उसकी साफ़ नहीं होगी, एकदम पाक नहीं होगी,
वो थोड़ा मुझसा दागदार भी होगा,
सोचो मेरा मेहबूब कितना सुन्दर होगा ।।

                      ✍ प्रियांश वर्मा



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