मां

कुमार संदीप जी द्वारा Poem on Mother In Hindi “माँ” की रचना की गई है। कविता में माँ के त्याग, बलिदान को दर्शाया गया है। एक माँ अपनी संतान के खातिर कितना समर्पण करती है, वह इस कविता के माध्यम से संदीप जी ने दर्शाने के कोशिश की है। अगर आप Poem On Mothers Day तलाश में हैं तो यह कविता बेहतर साबित होगी।

माँ
माँ ! आप वो आसमान हो
जो …अपनी संतान को
प्रेम से ढक कर रखता है

माँ
माँ ! आप वह सूर्य हो
जिसका …प्रकाश
आपकी संतान को
दुख के अँधीयारें से
दूर रखता है

माँ
माँ ! आप वो फूलों की बगिया हो
जिस…. बगिया का हर फूल
आपके लाल के
दुख को दूर करता है

माँ
माँ !आप वो वृक्ष हो
जिसकी …छाँव में
हम पुत्र बड़े हो
अपनी पहचान बनाते हैं

माँ
माँ ! आप वो बारिश की बूँदें हो
जो …अपने लाल के
सभी कष्टों को धो देती हैं

माँ
माँ ! आप वो श्यामपट्ट हो
जिस पर …नैतिकता व संस्कार
सिखाए जाते हैं

माँ
माँ ! आप वह त्याग की मूर्ति हो
जिसकी… तुलना
किसी से नहीं कर सकते

माँ
माँ ! आप वो शब्द हो
जिसका …वर्णन करना
किसी की कलम मसे संभव नहीं

माँ
माँ ! आप वो संपूर्ण व्याकरण हो
जिसे …पढ़ हम पुत्र
आपकों समझ नहीं पाते हैं

माँ
माँ ! आप वो नदी की धारा हो
जो …अपने साथ
संतान की पीड़ा को
कहीं दूर बहा ले जाती हो

माँ
माँ ! आपसे बस यही चाहिए आशीर्वाद
होना ना जुदा हमसे
चाहे कितनी सजा देना

कुमार संदीप

कुमार संदीप

कलम का छोटा सिपाही

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