“चाय” का एक प्याला

By sachin




दिन भर की सुस्ती छू हो जाए,
और दिन बन जाए निराला 
जब मिल जाए,

चायका एक प्याला…..

बारिश का हो मौसम या पड़ रहा हो पाला,
बेसन प्याज के पकौड़े के साथ मिल जाए 

चायका एक प्याला…..

रोज की झिगझिग ने परेशान कर डाला 
बस दो पल सुकून के मिल जाए,
और मिल जाए

चायका एक प्याला…..

किसी रेस्टोरेंट कि किनारे वाली कुर्सी हो 
और साथ हो एक बाला,
बातोंबातों में बात बन जाए, जब साथ हो 

चायका एक प्याला…..

जब मूड हो खराब और मुह से निकल रहा हो 
आग का गोला 
चल साथ दो बाते प्यार कि कर ले 
जब साथ हो 

चायका एक प्याला…..

हर बुरे समय के बाद अच्छा समय आता है 
रख भरोसा अपने पर और पी

चायका एक प्याला…..चायका एक प्याला….. 


(सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम)




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