मेरे इंतज़ार में

इंतेज़ार
कांटो सी चुभ रही है पाओ में,
कही तुम मेरा इंतज़ार में पलके बिछाये बैठे तो नही,  
हवाओ में आज कुछ नमी सी है,
बारिस भी आज कुछ थमी सी है,
कहीं तुम आंखों में सावन छुपाये तो नही,
शरमा के चाँद बादल में छुप गया है,
तारे भी आज अपनी रोशनी पे इतराते नही,
आंखों में तुमने कही काजल लगाया तो नही,
काटो सी चुभ रही है पाओ में, कही तुम मेरे इंतज़ार में पलके बिछाये बैठे तो नही।।
                                 ✍ sahin mirza


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