Hindi kavita “मुझे कुछ मिला नहीं” – Hindi Writings

Mujhe kuch mila nhi
जिंदगी की उलझनें- Hindiwritings

जिंदगी की उलझनों ने मुझे थकाया, रुलाया, हराया, इसका मुझे गिला नहीं
न रहता शोकमग्र मैं, और न करता शिकायत जिंदगी से कि ‘मुझे कुछ मिला नहीं’

अनेक दुखों, कष्टों, अनिश्चिताओं के बाद भी अपने सत् मार्ग से मैं हिला नहीं
मैं नवसंवत् का वह पुष्प हूँ, जिसमें निहित कई गुण व रंग है, पर अब तक खिला नहीं

सदैव सबके प्रति तत्पर रहा, पर मिली मुझे घृणा, क्या यह बुरा सिला नहीं
जिंदगी की राह ऊंच-नीच भरी रही, पर दूसरों को दर्शाया, ‘मेरा मार्ग पथरीला नहीं’

कई दुखों व विकारों ने मुझे तोड़ना चाहा, पर मैं तनिक भी पड़ा ढीला नहीं
मैं वो कठोर पत्थर हूँ जो अनेक चोट पड़ने पर भी बेअसर, व आसानी से टूटने वाली शीला नहीं

सच्चाई से जीने पर भी, फल पर्याप्त मुझे मिला नहीं
आत्मविश्वास से भरपूर, कठिनाइयों को लांघता मुझ-सा कोई जोशीला नहीं

परिश्रम करने पर भी मुझे प्राप्त हुई हो चाहे असफलता, पर वह दुखों का कोई किला नहीं
कभी न रहता शोकमग्र मैं, और न करता शिकायत जिंदगी से कि ‘मुझे कुछ मिला नहीं’

                                  ✍ श्रीकृत

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