मैं एक लड़की हूँ???


बड़े दिनों से कुछ लिखने की चाहत है,
सोचती हूँ क्या लिखूं, आखिर किस विषय पर लिखूँ!
फिर बहुत सोचा, अपने आस-पास देखा,
अपने भूत और भविष्य को टटोला।
भूत के कुछ पन्ने पलटे और भविष्य के लिए थी मैं परेशान,
मुझे तो वर्तमान ने ही कर दिया हैरान!!
सोचते-सोचते याद आया कि मैं एक लड़की हूँ,
महज़ इस बात के खयाल से ही विफर मैं उठती हूँ।
उस मासूम बच्ची का आखिर क्या था कसूर?
जिसे उन उग्र दरिंदों ने कर दिया मरने को मजबूर।
एक बार नहीं, दो बार नहीं, हज़ारों बार वो होगी बिलखी,
मुख से उसके हर बार ‘ माँ.. माँ मुझे बचा ले ‘ की चीख़ होगी निकली!!
अपने बचाव के लिए अंत तक की होगी उसने कोशिश,
फिर आखिरकार विदाई ले ली उसने इस दुनिया से, पीकर उन दुष्टों के कुकर्मों का विष।
वो तो नादान थी..
दुनियादारी से अनजान थी,
मगर हे मनुष्य-रूपी धरती पर रहने वाले राक्षसों,
तुम्हे तो उस बच्ची की मासूमियत की पहचान थी।
ऐसी घिनौनी हरकतों से उजड़ रहें हैं करोड़ों घरबार,
और इंसानियत भी हो रही है शर्मसार।
लड़कियों का इस समाज में हो रहा है रहना दुष्वार,
रूह काँप उठती है अब तो ये सोचकर भी कि भगवान लड़की न बना दे अगली बार !!

2 thoughts on “मैं एक लड़की हूँ???

  • February 18, 2019 at 6:26 pm
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    What a lines !!! Heart touching 😍🤩♥️😘😘😘

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