कैसे भूलूँ मैं…..

कैसे भूलूँ मैं…..
पाजेब की उस खनक को
हुश्न की उस चमक को
उस परी की झलक को

कैसे भूलूँ मैं….
उनकी कोमल बाहों को
उसके बालों की छाओं को
बहती हुई हवाओं को

कैसे भूलूँ मैं….
चाँद से प्यारे मुखड़े को
मेरे दिल के उस टुकड़े को
सफर के साथी बिछड़े को

कैसे भूलूँ मैं….
उस पहले प्यार को
किये गए इज़हार को
बीच पड़ी दरार को

कैसे भूलूँ मैं…..

3 thoughts on “कैसे भूलूँ मैं…..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *