कोयल कू कू करती है || HindiWritings

Koyal pr kavita HindiWritings
सुरीले स्वर वाली कोयल



कोयल कू कू करती है॥

बच्चो का मन भरती है॥


इसकी प्यारी बोली है॥


लगती कितनी भोली है॥


इसकी गीत बड़ी मतवाली॥


सब के मन को भाने वाली॥


प्यार का गीत सुनाने वाली॥


मन को बहुत लुभाने वाली॥


भोर होत उठ कहती बच्चो॥


उठो सबेरा आया है॥


चंदा मामा चले है घर को॥


रवि किरण फैलाया है…


प्रेम की गीत सुनाती है॥


प्यार का पाठ पठाती है॥


ऐसे बच्चो एक दिन जग में॥



नाम अमर कर जाओगे॥


छोड़े सपने जो बापू थे॥


पूरा करके दिखाओ गे॥


मीठी इसकी बोली है॥


लगती कितनी सोणी है॥


प्यार का गीत सुनती है॥


सब का मन बहलाती है॥


कोयल कू कू करती है॥


बच्चो का मन भरती है॥



चला चली गाँव की ओर॥२।


यहाँ पे देखो वहा पे देखो॥


खुल्लम खुल्ला करते शोर।


चला चली गाँव की ओर॥२।


वहा पे चाचा बुद्धू काका॥


आजा आजी नानी नाना॥


बड़े सबेरे उठते भोर॥


चला चली गाँव की ओर॥२।


यहाँ पे आयी ये बेकारी॥


दाता ये कैसे बेरोजगारी॥


घूंस खोरी की लगी है डोर॥


चला चली गाँव की ओर॥२।


अफसर नेता और सिपाही॥


करते बेकसूर पिटायी॥


ये कैसी है ताकत जोर॥

शंभु नाथ



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