ये पगली तुम्हे पुकारे प्रभु ॥ HindiWritings

Shiv Shankar



नगरी नगरी द्वारे द्वारे ॥
पल पल तुम्हे निहारे ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे प्रभु ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे
प्रातःकाल उठ क्रिया कर्म कर ॥
करती है स्नान ॥
थाल सजा कर पूजा हेतु ॥
धरती आप का ध्यान ॥
तेरे चरणो का वंदन करके ॥
आरति तेरी उतारे ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे|| 
भोग लगा के आप का देवा || 
तभी ग्रहण कुछ करती है || 
विरह की आग जलाये दिल में || 
सदा ये पगली रहती है || 
माया मोह से इसे न मतलब || 
न हीरे मोती सितारे || 
नगरी नगरी द्वारे द्वारे ॥
पल पल तुम्हे निहारे ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे प्रभु ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे
प्रातःकाल उठ क्रिया कर्म कर ॥
करती है स्नान ॥
थाल सजा कर पूजा हेतु ॥
धरती आप का ध्यान ॥
तेरे चरणो का वंदन करके ॥
आरति तेरी उतारे ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे|| 
आ के दरश दिखा अब जाओ || 
नेह की भूंखी भटक रही हूँ || 
आस लगाये कब से हूँ मै || 
बनी जोगिनिया तड़प रही हूँ || 
रोम रोम में तुम्ही बसे हो || 
अब तो कसर मिटा दे || 
नगरी नगरी द्वारे द्वारे ॥
पल पल तुम्हे निहारे ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे प्रभु ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे
प्रातःकाल उठ क्रिया कर्म कर ॥
करती है स्नान ॥
थाल सजा कर पूजा हेतु ॥
धरती आप का ध्यान ॥
तेरे चरणो का वंदन करके ॥
आरति तेरी उतारे ॥
ये पगली तुम्हे पुकारे

               ✍ Sambhu Nath



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