अभिनंदन हो अभिनंदन

थाल सजा के स्वागत करिये ||
मस्तक लगा के चन्दन ||
वीर सपूत वतन है लौटा ||
अभिनंदन हो अभिनंदन ||

साहस शौर्य पराक्रम पूरित ||
चतुर्मुखी चतुरायी ||
छालांग लगाया गगन से उसने ||
देख मौत घबड़ायी ||
दुश्मन के चंगुल में फंस करके ||
झुकी न जिसकी गर्दन ||
वीर सपूत वतन है लौटा ||
अभिनंदन हो अभिनंदन ||

भेद न कोई जिसने उगला ||
खोला कोई न राज ||
पाक परिक्रमा उसकी किया है ||
है भारत को उसपर नाज ||
चारो तरफ गूँज उसकी है ||
दूषित हुये है दुर्जन ||
वीर सपूत वतन है लौटा ||
अभिनंदन हो अभिनंदन ||

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