चुनाव प्रचार और होली

होली पे रंग लगाने के खातिर ||
नेता जी घर घर आयेगे ||
हाथ जोड़कर शीश झुका के ||
होठो से अबीर उड़ायेंगे ||

चमचे बजायेगे ढोल मजीरा ||
भक़्त फाग खूब खायेगे ||
गाँव गदेल खूब नाचे कूदेंगे ||
जनता भी ताली बजायेगे ||

वे वादों की बौछार करेंगे ||
बिन मतलब काम गिनायेगे ||
रोटी अव बोटी से जितने जुड़ेंगे ||
वे जय जय कार लगायेगे ||

भौजी खड़ी छत से ताकेगी ||
भइया उन्हें अजमायेगे ||
रंग में अपने रंग भौजी को ||
अंग से अंग भिड़ायेगे ||

लोगो को मूर्ख समझ के नेता जी ||
सब को फुद्दू बनायेगे ||
जीत गये तो लिख लो ये बतिया ||
पिछली होली को नहीं आयेगे ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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