माँ का कर्ज- A poem on mother in hindi

A poem written by poet Shambhu Nath on a mother’s sacrifice (A poem on mother in hindi, Poem on mother’s day in hindi)

बहुत बड़े बुद्धिमान बनोगे ||
जलते खम्भ उखाड़ोगे ||
पलक झपकते ही दुश्मन को ||
आगे बढ़ कर मारोगे ||
लेकिन अपनी माँ का कर्जा ||
कैसे यार उतारोगे ||

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पाताल से खींचोगे मोती को ||
आसमान से तारो को ||
अम्बर पुष्प भी बरसायेगा ||
समझेगी ख़ुशी इशारो को ||
दूध पूत सब भरे रहेंगे ||
पर पुरखो को तारोगे ||
लेकिन अपनी माँ का कर्जा ||
कैसे यार उतारोगे ||

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माँ के कोख से सात जन्म तक ||
जब जन्म ले पाओगे ||
हर जन्मो में माँ बाप को ||
तीरथ धाम कराओगे ||
तभी मनोरथ सिद्ध हो सकता ||
तुम बैकुण्ठ सिधारोगे ||
लेकिन अपनी माँ का कर्जा ||
कैसे यार उतारोगे |

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