पिछली होली की चोट

Holi poem in hindi

पिछली होली बीत गयी ॥
दे गयी सिर पर चोट ॥
हाथ पैर भी तोड़ लिया ॥
अफसर मांगे नोट ॥
अफसर मांगे नोट ॥
शराबी की संज्ञा दे डाली ॥
सगा संबंधी छूटा नहीं ।
सब को मिल गयी गाली ॥
थोड़ी पी कर दारू मै ॥
ऐसी घटना कर डाली ॥
गया पलंग पर सोय ॥
जहा सोयी थी घरवाली ॥
फट गया पजामा फटने से ॥
जब पहुंच गयी घर वाली ।
घरवाली की बात बतंगड़ ॥
सुन के हुआ अजीज ॥
उसी गुस्से में फाड़ दी ॥
दादा वाली कमीज ॥
घर से पंहुचा सड़क पर ॥
कर दीन्हा हंगामा ॥
सब कहते थे नया शराबी ॥
करता कैसा ड्रामा ।
बुरी मनी होली हमारी ॥
दे गयी कई खरोच ॥
पिछली होली बीत गयी ॥
दे गयी सिर पर चोट ॥
हाथ पैर भी तोड़ लिया ॥
अफसर मांगे नोट ॥

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