जो ईद को भी अपने सगे भाई से नहीं मिलते

मेरे  ख़ुलूस  की  गहरायी  से  नहीं  मिलते
यह  झूठे   लोग  हैं   सच्चाई  से  नहीं  मिलते

वो  सबसे  मिलते  हुए  हमसे  मिलने  आता  है
हम  इस  तरह  किसी  हरजाई  से  नहीं  मिलते

पुराने  ज़ख्म  ही  काफी  हैं   शुमार  करने  को
इसलिए  किसी  नए  शनासाई  से  नहीं  मिलते

हैं  साथ  साथ  मगर  फर्क  है  मिजाजों  का
मेरे  क़दम  मेरी  परछाई  से  नहीं  मिलते

मोहब्बतों  का  सबक  दे  रहे  हैं  दुनिया  को
जो  ईद को भी  अपने  सगे  भाई  से  नहीं  मिलते

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